ख़्वाब अभी अधूरा है। Poem by Anjum Alinagari

ख़्वाब अभी अधूरा है।

ख़्वाब अभी अधूरा है।
दिल ये ज़ख्मी पूरा है।

हम तो गांधीवादी ठहरे
उनके पास, अस्तुरा‌ है।

सड़क किनारे देखा हम ने
कैसे बिखरा, कुड़ा है।

जिससे जिससे लड़ा है अब तक
सब ने उसको थुड़ा है।

एक ग़रीब मज़दूर को देखा
सुबह में खाता, चुड़ा है।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

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ख़्वाब अभी अधूरा है
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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