भंग न हो शांति Poem by Anjum Alinagari

भंग न हो शांति

लानी है वो क्रांति ।
भंग न हो शांति।।

कोई भूखा सोए न।
नफ़रत कोई बोए न।।
माॅ का बच्चा खोए न।
कोई सच्चा रोए न।।।

लानी है वो क्रांति।।।2

ज़ुल्म के कोई भेंट चढ़े न।
हिन्दू -मुस्लिम, , , कभी लड़े न।।।।
द़ाग न धब्बा , वतन पे आए।
दिल की ये , आवाज़ बताए।।।।।

लानी है वो क्रांति।।।

रचना एवं लेख: -अंजुम अलीनगरी

दरभंगा, बिहार

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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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