लानी है वो क्रांति ।
भंग न हो शांति।।
कोई भूखा सोए न।
नफ़रत कोई बोए न।।
माॅ का बच्चा खोए न।
कोई सच्चा रोए न।।।
लानी है वो क्रांति।।।2
ज़ुल्म के कोई भेंट चढ़े न।
हिन्दू -मुस्लिम, , , कभी लड़े न।।।।
द़ाग न धब्बा , वतन पे आए।
दिल की ये , आवाज़ बताए।।।।।
लानी है वो क्रांति।।।
रचना एवं लेख: -अंजुम अलीनगरी
दरभंगा, बिहार
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