नोट बंदी Poem by Anjum Alinagari

नोट बंदी

जिधर देखता हूॅ अंधेरा है काला।
ग़रीबों की सारी कमाई पे ताला।

ख़बर है हूकुमत का है ये घोटाला।
अमीरों का घर है ख़ुशी से ऊजाला।।


ज़रा पूछये जा के ऊन बे बसों से।
वो गाॅओं शहर के, सभी बे कसों से।।

कई दिन से बिन काम बैठा है ख़ाली।
नहीं पास पैसा , बना है सवाली।।

ये ज़ुल्मों सितम है , मिला न निवाला।।।
ग़रीबों की सारी कमाई पे ताला।।।।


ये माॅ कह रही है , है बेटी की शादी।
न सोना ख़रीदा , न ले पाई चाॅदी।।

तड़पती है हर शौक़ , हसरत हमारी ।
न आया वो नौशा , न आई बाराती।।।

बहन कह रही है, ये कहती है ख़ाला ।।।
ग़रीबों की सारी कमाई पे ताला।।।।।

न है दूध घर में , न कोई दवाई।
ये कहती है जनता , है कैसी लड़ाई।।

अजब सी है आफत , ग़ज़ब सा तमाशा।
कहीं मुशकिलें हैं , कहीं है हताशा।।

ज़बाॅ कह रही है , ये दिल का है नाला।।
ग़रीबो की सारी कमाई पे ताला।।।।

रचना एवं लेख: - अंजुम अलीनगरी
दरभंगा, बिहार

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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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