किसी से कभी न, ख़ुदा से डरो तुम Poem by Anjum Alinagari

किसी से कभी न, ख़ुदा से डरो तुम

ये अख़लाक किरदार, ज़िन्दा रखो तुम ।
किसी से कभी न, ख़ुदा से डरो तुम ।
ये चाहत ख़ुदी का, दिखा दो जहां को ।

उठो उठ के फिर से, सदा दो जहां को ।

झुके न कभी ये तिरंगा हमारा ।
मिटे न कभी मुल्क का भाईचारा ।
अहद कीजिए हम मिटाएंगे नफ़रत ।
ये ग़ुलशन के गुल की बचाएंगे अज़मत ।
है पैग़ाम मेरा, सुना दो जहां को ।
तुम्ही तुम हो हर सु, बता दो जहां को ।
उठो उठ के फिर से, सदा दो जहां को।
© अंजुम अलीनगरी दरभंगा बिहार

Thursday, July 9, 2026
Topic(s) of this poem: nazm,urdu,indian,reveloution,poem
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नौजवानों को ललकारती हुई ये नज़्म, उनसे कहती है, आप‌ में वो शक्ति है जो हालात बदल सकते हैं
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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