ये अख़लाक किरदार, ज़िन्दा रखो तुम ।
किसी से कभी न, ख़ुदा से डरो तुम ।
ये चाहत ख़ुदी का, दिखा दो जहां को ।
उठो उठ के फिर से, सदा दो जहां को ।
झुके न कभी ये तिरंगा हमारा ।
मिटे न कभी मुल्क का भाईचारा ।
अहद कीजिए हम मिटाएंगे नफ़रत ।
ये ग़ुलशन के गुल की बचाएंगे अज़मत ।
है पैग़ाम मेरा, सुना दो जहां को ।
तुम्ही तुम हो हर सु, बता दो जहां को ।
उठो उठ के फिर से, सदा दो जहां को।
© अंजुम अलीनगरी दरभंगा बिहार
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