जामिया मिल्लिया इस्लामिया नई दिल्ली Poem by Anjum Alinagari

जामिया मिल्लिया इस्लामिया नई दिल्ली

96th Foundation day

सज के दुल्हन की तरह जामिया तैयार हुई!
उम्र इस की अभी नबबे के फक़त पार हुई!


जीतनी होती है पुरानी ये नई दिखती है.!
दिल पे हर शख़्स के ये अपनी ज़ुबान लिखती है!

मेरे आबा की निशानी है, मेरी शान है ये!
हिन्द में प्यार की अपनी , मेरी, पहचान है ये!



हर तरफ आज है, खुशयों में ये, डूबी डूबी!
एक क्या लाखों है, इस पाक ज़मीं की खूबी!


आज नफरत में भी उल्फ़त का ये सरमाया है!

वक़्त आया है तो ज़ालिम से ही टकराया है!


सारी दुनियां में तेरे इल्म के शैदाई हैं!

मैं हूं दीवाना तेरा, दिवाने मेरे भाई हैं!



हल्क़ा हल्क़ा तेरे गुलशन का है, आबाद हुआ.....

जो पढ़ाया था मुझे बा खुदा सब याद हुआ!


जो मेरे प्यार में डुबे हो तो आना हो गा!

राहे हक़ क्या है? ज़माने को बताना होगा!



मेरी खूबी कभी अंजुम नहीं लिख पायेगा!

ये वक़्त लफ़्ज़ों का एक आईना दिखलाएगा ।


रचना &
लेखक: - अंजुम अलीनगरी
दरभंगा, बिहार

COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
Close
Error Success