अदालत में सियासत का चलन है Poem by Anjum Alinagari

अदालत में सियासत का चलन है

अदालत में सियासत का चलन है।
यही कारण है, मुश्किल में वतन है।

हक़ीक़त को छुपा कर क्या मिलेगा
हमारा आख़िरी कपड़ा, कफ़न है।

बड़ा आसान है नफ़रत से लड़ना,
अगर चे प्यार, हिम्मत, और लगन है।

हमें भी राखियां बंधेगी आकर,
हमारे पास भी अपनी बहन है।

जिसे मैं प्यार करता ही नहीं था,
वो बन कर आ गई मेरी दुल्हन है।

जो हक़ को हक़ कहा करते यहां हैं
उन्हीं के वास्ते दार -ओ - रसन है।।।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Sunday, September 6, 2026
Topic(s) of this poem: ghazal,hindi
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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