चल उठा ले अपने हाथों में मशाल, इसलिए के देश का बिगड़े न हाल । Poem by Anjum Alinagari

चल उठा ले अपने हाथों में मशाल, इसलिए के देश का बिगड़े न हाल ।

चल ऊठा ले अपने हाथों में मशाल।
इसलिए के देश का बिगड़े न हाल।

धर्म का कोई न पाखण्डी बने।
देश का कोई न आतंकी बने।

कोई भी मासूम को तड़पाए न।
हक़ को कोई झूठ से झूठलाए न।

चल ऊठा ले अपने हाथों में मशाल।
ईसलिए के देश का बिगड़े न हाल।

सबसे पहले धर्म है इंसानियत।
अये सियासत बंद कर तू शैतनत।।

जुल्म को ज़ालिम को देना मात है।
है वतन मेरा यही ज़ज़्बात है।

चल ऊठा ले अपने हाथों में मशाल।
ईसलिए के देश का बिगड़े न हाल।

रचना एंव लेखः- -अंजुम अलीनगरी

दरभंगा, बिहार

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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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