हां, वो शिक्षक की याद आती है Poem by Anjum Alinagari

हां, वो शिक्षक की याद आती है

Happy Teacher's Day
हाँ, वो शिक्षक की याद आती है ।

जिसने पढ़ना हमें सिखाया था।
जिसने लिखना हमें सिखाया था।
जिसने रस्ता सही दिखाया था ।
जिसने एक गांव को पढाया था।

हाँ, वो शिक्षक की याद आती है।

हिन्दी इंग्लिश हमें रटाते थे।
क़लम सरपत का वो बनाते थे।
उर्दू लिखना हमें सिखाते थे ।
हो ग़लत, कुछ, तो वो बताते थे ।

हाँ, वो शिक्षक की याद आती है।

जो सियासत से दूर रहते थे ।
ज़ुल्म हरगिज़ कभी न सहते थे ।
डर के रहना कभी नहीं बेटा ।
वो बड़े प्यार से ये कहते थे ।

हाँ, वो शिक्षक की याद आती है।

फारसी ख़ूब जिनको आती थी ।
जब वो होते तो चिड़िया गाती थी।
उनकी ख़ूबी, बयां करूं कैसे ।
देख आँखें, ये मुस्कुराती थी ।

हाँ, वो शिक्षक की याद आती है।

एक शायर थे, डाक्टर भी थे ।
मेरे अब्बा जी, मास्टर भी थे ।
एक मदरसे में वो पढ़ाते थे।
गीत उर्दू का ही वो गाते थे।

हाँ, वो शिक्षक की याद आती है।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

अल्लाह मेरे वालिद साहब को जन्नत उल फिरदौस में आला मुक़ाम अता करे ।
आमीन

Saturday, September 5, 2026
Topic(s) of this poem: school,teacher
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शिक्षक दिवस के अवसर पर पिता मशकूर हसन मशकूर अलीनगरी, दरभंगा को समर्पित नज़्म
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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