दून इंटरनेशनल स्कूल, अलीनगर Poem by Anjum Alinagari

दून इंटरनेशनल स्कूल, अलीनगर

लाइट जलेगी इल्म की फिर से, मेरे गांव की बस्ती में।
मर्द ए मुजाहिद होंगे रहबर, होगी पढ़ाई सस्ती में।
दादाजी के दिल का फूल, जन्नत में खिल जाएगा।
इल्म का मर्कज़ जब अपना ये अलीनगर बन जाएगा।
बोग़ज़ व अदावत, नफ़रत किना, हो जाएगा दूर ।

आई है जन्नत से सदा, ये कहते हैं मंज़ूर।

जैन, हसन, फरीद ने मिलकर, पहली ईंट रखी है
हर अख़बार में पढ़ कर जाना, अच्छी बात लिखी है ।
ख़्वाबों को ताबीर मिली है, इसमें बहुत नफ़ा है।
इल्म को बांटो नहीं घटेगा, इसमें बहुत शिफ़ा है।
सारी उम्र का सदक़ा है, इल्म का गौहर देना ।
पूरी लगन से बच्चे सिखें, इल्म है उसका गहना।

दुआ ये अंजुम का शामिल है, नाम बड़ा ये पाए ।
यहां से जो बच्चा निकले वो, दुनिया में छा जाए ।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Saturday, July 4, 2026
Topic(s) of this poem: nazm,urdu,school,english,hope,education
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
ये नज़्म दून इंटरनेशनल स्कूल अलीनगर पर लिखी गई है। स्कूल के उदघाटन के अवसर पर इसे लिखा गया।
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
Close
Error Success