उम्मीद नहीं हारा जाए ।
हर हाल में, उसे पुकारा जाए ।
हां वही, जिसने जिंदगी दी है
याद कर के, उसे वक़्त गुज़ारा जाए ।
जिसकी फितरत में, लड़ना लड़ाना है
हो न हो, वो कहीं मारा जाए ।
ऐ वतन तेरी हिफ़ाज़त के लिए
जान जाए तो, पहले हमारा जाए ।।।
हम है अल्लाहु अकबर, कहने वाले
अर्श से फर्श तलक, ये तकबीर का नारा जाए ।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
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