मेरे उस्ताद, तेरा शुक्र अदा करते हैं Poem by Anjum Alinagari

मेरे उस्ताद, तेरा शुक्र अदा करते हैं

मेरे उस्ताद , तेरा शुक्र अदा करते हैं।
आप की उम्र में बरकत की दुआ करते हैं।

आप ने जो भी पढ़ाया है सबक़ याद हुआ ।।।।।
क़ैद में बंद ज़ेहन, इल्म से आज़ाद हुआ ।।।।।।


आप ने ख़ून से सिंचा है, संवारा है चमन।
याद आता है किया, आप का हर एक जतन ।

आप दर्जे में, मुहब्बत है क्या? बतलाते थे ।
आप दर्जे में, हर एक फ़र्ज़ को निभाते थे ।

बात की मार तो, अक्सर ही डरा देती थी ।।
रूबरू ग़लती से, हम सब को करा देती थी।

कितना प्यारा था, मेरे उस्ताद वो स्कूल का दिन ।
इस लिए आज भी आता है याद स्कूल का दिन।।

© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Saturday, September 5, 2026
Topic(s) of this poem: teacher
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शिक्षक दिवस के अवसर पर, बचपन के शिक्षक मास्टर ग़ुलाम फ़रीद साहब को समर्पित
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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