ज़मीं पे आफ़ताब हैं उस्ताद। Poem by Anjum Alinagari

ज़मीं पे आफ़ताब हैं उस्ताद।

ज़मीं पे आफ़ताब हैं उस्ताद ।
इल्म के इंक़लाब हैं उस्ताद ।।

मक़्सद ए ज़िंदगी बताने में
सबसे उनदह किताब हैं उस्ताद।

जो पढ़ाते नहीं हैं बच्चों को
वो तो सबसे ख़राब हैं उस्ताद।

एक मां ने मुझे कहा आ कर
मेरे बच्चों के, ख़्वाब हैं उस्ताद।

काम आकर के उनका देखें वो
जिनको लगता, नवाब हैं उस्ताद।

मेरी मानों, के ज़िंदगी के लिए
हर कहानी के, बाब हैं उस्ताद।।।

सारे बच्चों के बीच, दर्जे में
ऐसा लगता, गुलाब हैं उस्ताद।

इस ज़मीं के तमाम लोगों में
सबसे इज़्ज़त मुआब हैं उस्ताद। ‌

इल्म की क़द्र जो नहीं करते
उनके ऊपर अज़ाब हैं उस्ताद।

बांट देते हैं इल्म की दौलत
फिर कमाते, सवाब हैं उस्ताद।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
Happy Teacher's Day

Saturday, September 5, 2026
Topic(s) of this poem: hindi,poem,teacher
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उस्ताद की ख़ुशबू को बयान करती हुई सुंदर नज़्म
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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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