अपनी बंदगी से... Apni Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

अपनी बंदगी से... Apni

Rating: 5.0

अपनी बंदगी से

रविवार, ५ अगस्त २०१८

नाम ही मेरा हसमुख
कभी नहीं ग्लानि मुख
सोचता रहता हूँ हरदम
कभी ना आए जिंदगी में गम।

हरदम हसाता रहता हूँ
रुलाने का प्रयास मभी नहीं करता हूँ
जहाँ तक हो सके दुःख में भागीदार बनता हूँ
उसके सुख को मेरा सुख समझकर हँसता रहता हूँ।

जीवन में ना आए कभी पतझड़
ना मभी किसीका संसार हो जाए उझड़
ना रहे कोई उखड़ा उखड़ा
जिसे ना सुनना पड़े किसीका दुखड़ा।

अब तो मुझे आदत सी हो गई है
जिंदगी से मुहोब्बत हो गई है
ना वो सताती है और नाही दिख देती है
बस सिर्फ हर्ष के आंसू ला देती है।

मै कहता रहता हूँ "ऐ जिंदगी अब तो सबर कर "
कर अपने बंदो को थोड़ा तो बक्शा कर!
ऐसी भी क्या बेरुखी को दिखलाना?
अब कभी भी उनको ना रुलाना।

ना अश्रु आए आँखों से
हंसी और दुखों से
बस खुशखुशाल रहे सब अपनी जिंदगी से
और प्यार से खुश रहे अपनी बंदगी से।

हसमुख अमथालाल मेहता

अपनी बंदगी से... Apni
Saturday, August 4, 2018
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 05 August 2018

welcome GHe Rubiales 1 mutual friend 1 Manage Like · Reply · 1m

0 0 Reply
Mehta Hasmukh Amathalal 05 August 2018

Shiju H. PallithazhethShiju H. brilliant hasmukh Manage Like · Reply · 1h

0 0 Reply
Mehta Hasmukh Amathalal 05 August 2018

welcome Virginia Subia 242 mutual friends Message

0 0 Reply
Mehta Hasmukh Amathalal 05 August 2018

welcome Shiju H. Pallithazheth 283 mutual friends 1 Manage Like · Reply · 1m

0 0 Reply
Mehta Hasmukh Amathalal 05 August 2018

ना अश्रु आए आँखों से हंसी और दुखों से बस खुशखुशाल रहे सब अपनी जिंदगी से और प्यार से खुश रहे अपनी बंदगी से। हसमुख अमथालाल मेहता

0 0 Reply
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
Close
Error Success