अरे मानव!
शुक्रवार, १० जावरी, २०२०
अरे मानव!
तू बन गया दानव
क्यों है तुझे अवढव?
क्यों देता है तू घाव?
क्यों हो गया रक्तपिपासु?
क्यों नहीं बहते तेरे आसु?
ये तेरे रक्तरंजित हाथ!
नहीं देंगे कभी तेरा साथ।
हमें शांति से जीने दे
और मरने भी दे
वैसे भी हम मरे पड़े है
खाने के भी लाले पड़े है।
किस किस से, लडे हम!
नहीं रहा कोई, हमारा हमदम
तू क्यों दिखा रहा इतना दम?
कर देना एक बार में ही काम तमाम।
तुम नहीं दे सकते सबको खाना-पानी?
कहते सब है पर करते आना-कानी
कहते कुछ, करते कुछ
समय आनेपर भाग जाते दबाके पूछ।
जिस के हाथ में हो लठ, उसीकी हो रही भेंस
हम रहते सदा असमंजस
मानव तू क्यों हो गया क्रूर?
क्यों है तुझे इतना गुरुर? ?
हसमुख मेहता
welcoem ashok kumar 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m
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जिस के हाथ में हो लठ, उसीकी हो रही भेंस हम रहते सदा असमंजस मानव तू क्यों हो गया क्रूर? क्यों है तुझे इतना गुरुर? ? हसमुख मेहता