बदल दिया... Badal Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

बदल दिया... Badal

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बदल दिया
रविवार, ५ जनवरी २०२०

ना कुछ कहो
बस सुनते रहो
कुछ अपनी भी बनाओ
सब को ये बात सुनाओ।

परेशान ना हो
बस तसल्ली हो
ये तो चली जाएगी
बाद में ख़ुशी छोड़ जाएगी।

ना रखो गम
बस कर लो काम तमाम
अपनी सोच पर रखो लगाम
घूमते रहो, देते रहो पैगाम।

वक्त के साथ चलो
अपने को बदलते रहो
यदि प्ररिस्थितयां अनुकूल नहीं
तो मन में कोई परवाह नहीं।

जब हवा का रुख बदले
तो सवार हो चले
अपनी मंझिल को सवारले
और रहे खुश और मतवाले।

जो हार गया वो मर गया
जो भूल गया वो जित गया
जिसने कदम से कदम मिला दिया
उसने मानो हवा का रुख बदल दिया

हसमुख मेहता
साभार: एस. आर।चन्द्रसलेखा

बदल दिया... Badal
Saturday, January 4, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 05 January 2020

Ashok Kumar A great message for all to become the winner in this beautiful world 1

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Mehta Hasmukh Amathalal 05 January 2020

S.r. ChandrslekhaActive now S.r. Chandrslekha Wonderful write dear poet. Delete or hide this 1 Like · Reply · 4h

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Mehta Hasmukh Amathalal 05 January 2020

Ashok Kumar 242 mutual friends Message

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Mehta Hasmukh Amathalal 05 January 2020

Chandan Deka 49 mutual friends

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Mehta Hasmukh Amathalal 04 January 2020

वक्त के साथ चलो   जो हार गया वो मर गया जो भूल गया वो जित गया जिसने कदम से कदम मिला दिया उसने मानो हवा का रुख बदल दिया   हसमुख मेहता साभार: एस. आर. चन्द्रश्लेखा

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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