बंधन-दोस्ती
रविवार, १ अगस्त २०२१
करके तो देखो दोस्ती!
नहीं है वो इतनी सस्ती
दोस्तों के साथ मस्ती
बस पार हो जाए कश्ती।
अल्हड जान और साथ कुश्ती
मारामारी और धक्कामुक्की
के दुसरे के बिना ना रह पाना
समयः आनेपर जान की बाजी लगा देना।
बचपन की दोस्ती रहे हमेशा याद
भले ही कितने भी होते हो वाद
लड़ना झगड़ना फिर साथ हो जाना
हाथ में हाथ रखकर फिर एक हो जाना।
कभी ना छूटने वाला साथ
बचपन, , यौवन और फिर पढ़ाई
एक ही शहर में हो तो रोज मिलाई
एक दूसरे की ताकत बनाई।
दोस्ती की लोग मिसाल देते है
अपने लगाव से उसे बेमिसाल बना देते है
कभी ना तूटनेवाला स्नेह का एक बंधन
यादो मे रहनेवाला बचपन और यौवन।
दोस्तों की याद और अटूट यारी
संसार की बनी है पवित्र धुरी
संसारी हो या अलगारी
सब को है अपनी दोस्ती प्यारी
डॉ हसमुख मेहता
साहित्यिकी
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