बस अपना लो ना
ना सोचो इतना की मन ही पसीज जाय
बना बनाया खेल ही बिगड़ जाय
अरे हमने प्रस्ताव ही तो दिया है!
ऐसा क्या हुआ जैसे आसमान तोड लिया है?
मान मर्यादा का हमें भी भान है
हमारे कर्तव्य के प्रति हम भी सभान है
पर दिल तो दिल ही है
समय आने पर कुछ मांग कर ही लेता है।
किसी के प्रति लगाव हो जाने से इंतजारी बढ़ती है
नदी अपने प्रवाह में ज्यादा उत्साह से बहती है
उसे नहीं पता वो किस किस को अपने साथ खिंच ले जाती है
बस अपने में मगन, खिलखिलाती, और टकराती है
प्यार, पतन का मार्ग नहीं
उसमे लिप्त हो जाना कोई नर्क नहीं
वो तो एक बहाव है, जो खिंच लेता है
प्यार में एक आह्वाहन अपने आप दे देता है।
नदी का समंदर में मिल जाना
नहीं कहलाता कोई गर्ता में डूब जाना
माना की समय के पहले उसका हो जाना अनिवार्य नहीं
पर प्यार को रोके रखना भी स्वीकार्य नहीं
प्यार को जताना कोई जटिल समस्या नहीं
पूनम के उजाले में अमावस्या कोई याद करता नहीं
बस एक जोर का झोका मदमस्त बना देता है
आदमी तो क्या भगवान को भी अपना कर देता है।
न करो हमें और पागल इस दुनिया में
हम ने तो कह रखा है और जताया भी है
अब आप उसे कोई भी रूप दे दो
बस हमें जीने कोई एक मकसद तो दे दो?
आप तो लता की तरह लिपट जाती थी
समय के प्रति समर्पित और शर्मा जाती थी
अब तो न करो देर ओर आ जाओ ना
करो ना हमें कंमजोर बस अपना लो ना
Beautiful Romantic poem....I loved reading each lines... poonam kay ujaley mein amavasya ko koi yaad kartha nahin. Sahi kaha aapney. aapki kavita badi hi pyari hai. Thanks for sharing..
Manish Shrivastav Itm likes this. Hasmukh Mehta welcome Just now · Unlike · 1
Hasmukh Mehta welcoem asha, pandey, asha ojha Just now · Unlike · 1
Rajendra Singh Shekhawat likes this. Hasmukh Mehta welcome Just now · Unlike · 1
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Govindkumar Nair likes this. Hasmukh Mehta welcome govind Unlike · Reply · 1 · Just now
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welcome kavindra dhir Just now · Unlike · 1