बेकार राजनीतिज्ञ
गुरूवार, ७ अक्टूबर २०२१
ये बेकार राजनीति राजनीतिज्ञ
बन जाते तजज्ञ
रहे सदा अनभिज्ञ और अज्ञानी
मस्त रहते गुमानी।
हमको देनी है सांत्वना
व्यक्त करनी है वेदना
उमड़ पड़ते है जहां देख मधुछता
वापस पानी है सत्ता।
साथ में कुछ नहीं लाए
परिवारों को कह गए
हम तुम्हारे साथ है
हमारे हाथ का संगाथ है।
चुन लेते है अज्ञात स्थल
हो जाते उपस्थित आज और कल
नहीं जानते कितने सुहाग उन्हों ने उजाड़े है
कितनो को रोंदा है दिन-दहाड़े में।
बेकार है हमारी, तुम्हारी पसीने की कमाई खाते है
लाखो रुपये जमीं जायदाद बसाते है
फिर भी पेट नहीं भरता तो दंगे करवाते है
इंसानियत का खुन बेहवाते है
गिरगिट की तरह रंग बदलते
बोल इनके सदा फिसलते
कुछ भी बोल देते है
न्यायलय में मांफी मांगते और गिड़गिड़ाते है।
कुर्क हो इनकी संपत्ति
जेल में डालो यदि है दंपति
एक कुटुंब से एक ही हो उम्मीदवार
जनता को वापिस बुलानेका हो अधिकार।
इनपर लगे मुकददमे त्वरित आरम्भ हो
शुद्ध राजनितिक वातावरण का शुभारम्भ हो
नो हो इनको बोलनेकी इजाजत बिना सुबूत
हो जाय ससुरवार तो ताबूत में बंध हो।
ना हो इनका पेंशन
मिले सिर्फ दूकान से राशन
बैठने दो उनको अनशन
ना चले उनका रोना सनातन।
करनी है राजनीति तो करो
पर अपना घर ना भरो
ना हो जातिभाव दुर्भावना
राजनीज्ञ वो हो जो फैलाये सद्भावना।
डॉ. हसमुख मेहता
साहित्यिकी
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