भर लो झोली
रविवार, २ अगस्त २०२०
भर लो झोली आज तुम मेरी
सुन लो दिली विनती मेरी
मेरे सपने होंगे कब पुरे?
मेरा दिल कब से पुकारे!
ना चाहे मैंने ऊँचे महल
बस ख्वाब मैं की थी पहल!
अब क्यों होने लगी चहल-पहल?
मन में हो रही बड़ी हलचल।
में एक अदना सा छोटा आदमी
ना जान सका दुनिया मायावी
उसकी हर चाल लगती मुझे फरेबी
हर इंसान लगता मुझे मतलबी।
में रंगना चाहु अपने रंग
ना होने देना उसमे भंग
हर चाल मेरी सब से न्यारी
में घूमता रहा बन अलगारी।
नहीं चाहिए मुझे जन्नत का सुख
बस हंसी बनी रहे चमकते मुख
आप भले ही रखे मुझे वंचित
में कभी भी नहीं रहूंगा चिंतित।
बस थोड़ी सी आस कर लो पूरी
वरना जिंदगी रह जाएगी अधूरी
मेरा भविष्य घुम रहा इस धुरी केआसपास
बस लगा के बैठा हूँ छोटी सी आस।
डॉ। जडिआहसमुख
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मेरा भविष्य घुम रहा इस धुरी केआसपास बस लगा के बैठा हूँ छोटी सी आस। डॉ। जडिआ हसमुख