बिगड़ी हुई बाजी bigdi hui baaji
ना मुड के कभी देखना
क्यों दुःख को फिर से झेलना!
जो बित गया वो बुरा कल था
ना सम्हल ने वाला हमारा हाल था। बिगड़ी हुई बाजी
हम एक टांका लगाते थे
ओर बारह टूट जाते थे
यही जीवन में असमंजस थी
पर जीवन संग्राम की एक पेशकश थी। बिगड़ी हुई बाजी
कभी भूखे सो जाते थे
रात रातभर जागते रहते थे
'कल क्या होगा' यही सोचकर सुबह हो जाती थी
सुबह की उषा हमें मौत मोटी की घडी गिनाती थी। बिगड़ी हुई बाजी
हम कच्चे मिट्टी के घड़े जरूर थे
पर इतने भी बेअसर नहीं थे
समय आने पर रंग दिखाने की क्षमता भी रखते थे
दुश्मन के भी दांत खट्टे रखने की हिम्मत रखते थे। बिगड़ी हुई बाजी
आगे देखिने की हिम्मत रंग लायी
घर एम् थोड़ी सी मरम्मत हुई तो दीवारें निखार लायी
हम भी थोड़े ख़ुशी से झूम उठे
हिम्मत और जुटाके याहोम कर के आगे चल पड़े। बिगड़ी हुई बाजी
आघे तो सोने की लंका थी
हमें फिर भी बहुत शंका थी
खेर! हम उसके करीब आ पहुंचे थे
क्योंकि हमारे इरादे ऊँचे थे। बिगड़ी हुई बाजी
हमने जो ठानी थी वो कर दिखाया
जीवन का खालीपन दूर कर के दिखाया
कुछ दो पैसे और इज्जत भी कमा ली
बिगड़ी हुई बाजी को फिर से सम्हाल ली। बिगड़ी हुई बाजी
welcomem Ramashankar Tiwari Ramgopal Tiwari Unlike · Reply · 1 · Just now
Aasha Sharma Achi koshish ki bigadi ko sambhal ke aapne. See Translation Unlike · Reply · 1 · 2 mins
welcome Fitria Kosong HijiSalapan Unlike · Reply · 1 · Just now 1 hour ago
welcome Rajesh Labana Unlike · Reply · 1 · Just now
welcoem girish dhobi Unlike · Reply · 1 · Just now
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem
welcome ritu kashyap Unlike · Reply · 1 · Just now