बोझिल नहीं है।
दिन तो हमारा है
कामकाज भी करना है
रात मे थोड़ा सोचना है
ख़ुशी हो तो ठीक बाकी थोड़ा रोना भी है।.
हम न मिल सके दिन में
तो रात को संजोना है
दिल में रखे ख़्वाबों को सजाना है
यही तो हमारा अनमोल खजाना है।
दिन रात न सही
उजाला और अंधेरा भी नहीं
कोई और रास्ता तलाश करना है
जीने की राह है कुछ भी मना नहीं है
चाहत हमारी धरोहर है
उसकी कल्पना ही मनोहर है
एक छाँव है पहला कदम है
घाव नही पर उसपर लगा मरहम है।
जब भी मिलेंगे बातें तो होगी ही
रात भी भीगी भीगी होगी ही
शाम का नजारा कुछ और होगा
मिलने का हमारा नजरिया कुछ और होगा।
चाहेंगे हम् तुम्हे कुछ युही
जैसे रात दिन कभी मिलते नहीं
फिर शाम का वक्त है थोडा सा मिलने का
वादा करने का और निभाने का।
ना गम होगा मिलने का यदि संभव नहीं
मन में कोई गिला नहीं और अवढ़व भी नहीं
सही राह है सही मंझिल है
रास्ते कठिन है पर बोझिल नहीं है।
welcome jitendra patel Unlike · Reply · 1 · Just now
welcome pragati bandhu Unlike · Reply · 1 · Just now
welcome dilip makwana Unlike · Reply · 1 · 1 min Hasmukh Mehta Hasmukh Mehta bhagirathsinh jhala Unlike · Reply · 1 · 2 mins
welcome 2DrSatinder Parkash Nanda Unlike · Reply · 1 · Just now
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welcome krupal lahiya Unlike · Reply · 1 · Just now