शब्द ही असार सारे Poem by Chaitanya Kanherikar

शब्द ही असार सारे

शब्द ही असार सारे निष्प्रभ शब्द निराधार l अशब्द ही आधार मौन पूर्ण निराकार निर्विकार ll इति: चैतन्य. चैतन्य कन्हेरीकर २२सप्टेंबर२४

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