चन्द्रमा भी
शनिवार, २५ जुलाई २०२०
हमेशा थी तू सुंदर और खूबसूरत
बस अब बिगाड़ दी है सूरत
चन्द्रमा भी मुझे लगा बदसूरत
कार्रवाई हो इसपर तुरंत।
चन्द्रमा पर कालिख मुझे नहीं पाई
ये काला दाग की कल्पना मुझे रास नहीं आई
क्या कमी रह गयी जो चिंता तुझे ले आई?
कितने कितने चाहनेवालों को निराशा ले आई।
हमने सदा चाहा तुम हसती रहो
मुस्कराहट बिखेरती रहो
सबके दिल में सदा बसती रहो
और गुनगुनाती रहो।
किसी भी इंसान का आइना है चेहरा
उसपर कभी ना लगाओ पेहरा
चेहरेपर छा जाएगी कालेबालों की घटा
फिर ना रहेगी वो पहले वाली छटा।
चाँद निकला तो मन प्रफुल्लित हो गया
मन तो वाकई में नवपल्ल्वित कर गया
तुम तो रही सदा हमारे मन की कल्पना
हम करते रहे मन ही मन तुम्हारी आराधना।
करो मेहनतइतनी की फिर निखार आ जाए
शरीर से बिमारी और बुखार चला जाए
पहले की तरह मुस्कराहट को लाया जाय
चमन में फिर उसी तरह की बहार लाया जाय।
डॉ जाडिआ हसमुख
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करो मेहनतइतनी की फिर निखार आ जाए शरीर से बिमारी और बुखार चला जाए पहले की तरह मुस्कराहट को लाया जाय चमन में फिर उसी तरह की बहार लाया जाय। डॉ जाडिआ हसमुख Hasmukh Amathalal