दासी हूँ में तुम्हारी
गुरूवार, १२ मार्च २०२०
कैसे भज पाऊं नाम तुम्हारे
तुम तो हो बंसी के सहारे
नाम ना जानू बहूत ही सारे
काना, काना नाम पुकारे। दासी हूँ में तुम्हारी
बन जाऊं में दासी तुम्हारी
प्रभु आपकी है लीला न्यारी
में तो हूँ एक अबला नारी
सबसे अलग रहती अलगारी। दासी हूँ में तुम्हारी
राधा ने अपनी धुन लगाई
मन ही मन रची सगाई
आप को भी मन से भाई
यही को कहते प्रेम सगाई। दासी हूँ में तुम्हारी
ना मेरे मन में कोई दुविधा
ना चाहिए मुझे कोई सुविधा
अब तो आन मिलो मोरे गिरधारी
जग के पालन करता मुरारी। दासी हूँ में तुम्हारी
प्रभु बने हो मेरे घनश्याम
करते हो सबके काम तमाम
चरण में दीजो हमको मुकाम
सुबह शाम लेते है तुम्हारा नाम। दासी हूँ में तुम्हारी
राधे राधे राधे राधे
क़ाम रह गए मेरे आधे
ना में देख पाई ना सुन पाई
ये कैसी है मन की कठिनाई। दासी हूँ में तुम्हारी
हसमुख मेहता
आभार: एस. आर.चन्द्रसलेखा
S. R Chandralekha Very melodious. Wonderful composition sir.
Hasmukh Mehta welcome s r lekha 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m
Hasmukh Mehta Hasmukh Mehta Rajkumar Soni Shadewadha 5 mutual friends 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m
कैसे भज पाऊं नाम तुम्हारे तुम तो हो बंसी के सहारे नाम ना जानू बहूत ही सारे काना, काना नाम पुकारे। दासी हूँ में तुम्हारी बन जाऊं में दासी तुम्हारी प्रभु आपकी है लीला न्यारी में तो हूँ एक अबला नारी सबसे अलग रहती अलगारी। दासी हूँ में तुम्हारी राधा ने अपनी धुन लगाई मन ही मन रची सगाई आप को भी मन से भाई ना में देख पाई ना सुन पाई ये कैसी है मन की कठिनाई। दासी हूँ में तुम्हारी हसमुख मेहता आभार: एस. आर.चन्द्रसलेखा Hasmukh Amathalal
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem
Aarangot Swaroopam Good compositions 1 Delete or hide this Like · Reply · 1d