देखते हो सबको.... Dekhte Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

देखते हो सबको.... Dekhte

Rating: 5.0

देखते हो सबको
Monday, November 18,2019
10: 28 AM

देखते हो सबको
अपने को कब देखोगे?
आईने में मुंह छुपाकर
कब तक रहोगे?

बहुत कर दिया धमाल
पर अपने को सम्हाल
बिगड़ जाएंगे तेरे हाल?
यदि की हरकत गलत तो बिगड़ जाएंगे हालचाल।

किया सब का उपहास
फिर भी ना आया रास
गुलाब की भी ना आई तुजे सुवास
पत्नी की भी ना सुनी आगास रख के इतना सहवास।

नजर में कुछ और
जुबान पर गैर
अपना बनाके तो देख
मीठे फल को चख के तो देख।

कवी कहता है खुद को
भूल गया है खुदा को
बंदगी करके तो देख
सादगी का तो ले कभी भेख।

ना कर प्रेम दिल से
मिलजुल के तो देख
सब कुछ छिपा है उस पल में
कभी बिता के तो देख।

हसमुख मेहता

देखते हो सबको.... Dekhte
Sunday, November 17, 2019
Topic(s) of this poem: november,poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 17 November 2019

ना कर प्रेम दिल से मिलजुल के तो देख सब कुछ छिपा है उस पल में कभी बिता के तो देख। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal

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Mehta Hasmukh Amathaal

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Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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