देरी पर अंधेर नहीं
बुधवार, १ अप्रैल २०२०
उसके घर देरी है
पर अंधेर नहीं है
यहाँ लगती हैं बोलीइंसानियत की
क्यों की खोट है नियत की।
हमने कुछ भी नहीं छोड़ा
इंसानियत को पीछे छोड़ा
भाई-भाई का दुश्मन
बाप बेटे का नहीं जित सका मन।
इसी मझधार में हमने चलानी है कश्ती
जीवन के हर मोड़पर करनी है मस्ती
भाईचारा भी रखना है और महोब्बत भी
अरमानों को पूरा करना है रखनी है साफ़ नियत भी।
हम ने हर मोड़पर अपनी नाकामीपन साबित किया
इस भीड़ में अपनापन भी खो दिया
अपनों से बैर और सूखापन दिखा दिया
प्यारे दोस्तों को भी अपना अंगूठा दिखाकरमुँह मोड़ लिया।
मान लिया की मैंने यहाँ ही रहना है
दौलत से घर को महल बनाना है
शान-शौकत और ऐश्वर्य ही मेरा ईमान
सब लोग दीखते मुझे बईमान।
मेरा बस चले तो में आसमाँ अपना कर लूँ
मेरी ताकत को और आगे कर दूँ
पर मेरा कहाँ चलनेवाला है
मेरे को सम्हालनेवाला तो ऊपरवाला ही है
आज पुरे संसार में ग्रहण लगा हुआ है
करोना का पुरजोर से आक्रमण है
मानवी फिर भी अपनी मौत को दावत दे रहा है!
गलती पर गलती किए जा रहा है।
हसमुख मेहता
आभार: अशोक शर्मा
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आज पुरे संसार में ग्रहण लगा हुआ है करोना का पुरजोर से आक्रमण है मानवी फिर भी अपनी मौत को दावत दे रहा है! गलती पर गलती किए जा रहा है।
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S. R Chandralekha 🙏🙏🙏You are great, Wonderful write dear poet Hasmukh Mehta Sir. 🙏🙏🌹🌹 1 Hide or report this Like · Reply · 2h Hasmukh Mehta Hasmukh Mehta welcome s r lekha 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m