दोस्ती की मस्ती..Dosti Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

दोस्ती की मस्ती..Dosti

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दोस्ती की मस्ती
सोमवार, ५ अगस्त २०१९

रूठे हुए को मनाना
फिर गले से लगाना
दिल से उसे अपनाना
फिर कभी ना लगे बेगाना।

दिल कहे या ना कहे
बस दोस्ती का अर्थ बना रहे
वो तो एक झरना है
हमें उस से पावन होना है।

दोस्ती
इस का मतलब ही है मस्ती
उसको ना बना ना कभी सस्ती
उसकी चिट्ठी को ना समज़ना पस्ती।

अपना अपना ढंग है
पर अपनापन का रंग है
उस मे उमंग है
दिल में उठता हुआ तरंग है।

कभी गीला नहीं करना
सोच आभी जाएतो दूर कर देना
टूटा हुआ विश्वास प्रस्थापित करना मुश्किल है
दोस्ती निभाना बहुत ही आसान है।

हसमुख मेहता

दोस्ती की मस्ती..Dosti
Sunday, August 4, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 05 August 2019

neha tomar 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m

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Mehta Hasmukh Amathalal 05 August 2019

Surbhi Islam Hasmukh Mehta nice one sir! ! 1 Hide or report this Like · Reply · 2h

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Mehta Hasmukh Amathalal 04 August 2019

कभी गीला नहीं करना सोच आभी जाएतो दूर कर देना टूटा हुआ विश्वास प्रस्थापित करना मुश्किल है दोस्ती निभाना बहुत ही आसान है। हसमुख मेहता

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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