एक दरिया..... Ek Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

एक दरिया..... Ek

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एक दरिया
शनिवार, ६ अक्टूबर २०१८

जीवन है एक दरिया
जीने का माध्यम और जरिया
सब को जीना है और सबको मरना
सबको सम्हलकर आगे है बढ़ना।

सब कुछ आपके हाथ में है
जीवन साथी भी संगत है
कुटुंब, कबीला आपकी शरण में है
बच्चे, बूढ़े आपकी और देखते है।

अच्छे काम के है सब सहभागी
नहीं देते सलाह वणमागी
सब खुश है आपको सलामत देखकर
दुआ देते है आपकी लम्बी उम्र को लेकर।

आपके साथ उनका भाग्य भी जुड़ा
आपका जीवन भी उनसे ही समला
वो ही है अकेला कमानेवाला
सभी रीतिरिवाजों को सम्हालनेवाला।

आनी जानी तो लगी रहेगी
कुछ ना कुछ कमी तो हमेशा रहेगी
प्यास, सोचोगे तो और बढ़ेगी
नहीं सोचोगे तो वहां की वहां रुकेगी।

हसमुख अमथालाल मेहता

एक दरिया..... Ek
Saturday, October 6, 2018
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 07 October 2018

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Mehta Hasmukh Amathalal 07 October 2018

welcome Khalid AL-hamami 1 Manage Like · Reply · 1m

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Mehta Hasmukh Amathalal 06 October 2018

आनी जानी तो लगी रहेगी कुछ ना कुछ कमी तो हमेशा रहेगी प्यास, सोचोगे तो और बढ़ेगी नहीं सोचोगे तो वहां की वहां रुकेगी। हसमुख अमथालाल मेहता

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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