एक बंधन
सोमवार, १६ सितम्बर २०१९
रिश्तों की डोर
रहती है एक छोर
जितना भी मचालो शोर
नहीं जाती कहीं और।
ये तो एक है बंधन
रहता है जनम जनम
कोई कहता है सनम
तो कोई कहे जानम।
नहीं होती इसमें कोई शरत
ना कोई देखता है मूरत
बंध जाती है डोर तुरंत
और चलती रहती है अविरत।
रिश्ता बनाना है आसान
पर निभाना नहीं आसान
खड़ी कर देता है मुश्किल
चुनौती है आनेवाला कल।
निभाना तो पडता है
पर आदमी लड़ता है
कुछ भी हो जाए पर परवा तो करता है
रिश्ता से जो वास्ता होता है।
ये इतना जल्दी नही टूटनेवाला
पर होना चाहिए निभानेवाला
रिश्ते बनते है एकबार
तुम भूल नहीं पाओगे मेरे यार।
हसमुख मेहता
Courtesy: Asim Halder
ये इतना जल्दी नही टूटनेवाला पर होना चाहिए निभानेवाला रिश्ते बनते है एकबार तुम भूल नहीं पाओगे मेरे यार। हसमुख मेहता Courtesy: Asim Halder Hasmukh Amathalal
ये इतना जल्दी नही टूटनेवाला पर होना चाहिए निभानेवाला रिश्ते बनते है एकबार तुम भूल नहीं पाओगे मेरे यार। हसमुख मेहता Courtesy: Asim Halder Hasmukh Amathalal
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