फ़र्ज़
बुधवार, २६ दिसंबर २०१८
एक पल को पूरा करने में २० साल लगे
वचन देने में कीसी को कोई भी कठिनाई न लगे
"बोलने में क्या हर्ज है "?
कोई नही समझता ये हमारा कर्तव्य है।
प्रगति का मापदंड क्या है?
लोगों को कितनी सुविधा मिलती है?
कितने लोक-कल्याण के काम हो रहे है?
लोगों को योजनाओं का कितना सारा लाभ मिल रहा है।
सत्तर साल तक हम समय बिताते रहे
लोगों को धर्म, जाती पर बांटते रहे
लघुमति कोमों कोप्रलोभन देते रहे
और कोमो के बीच वैमनस्य फैलाते रहे।
ऐसी प्रवृति पर थोड़ी रोक लगी है
प्रजा के लिए किए गए काम दिख रहे है
अल्प समय में काम कर दिखाना संभव नहीं
पर थोड़ा थोड़ा करना असंभव भी नहीं।
प्रजा ने सोचना है वो कैसा देश चाहती है?
मजबूत और स्वावलबी बनाना चाहती है
प्रगति के पथ पर चलना चाहती है
और सारे विश्व को बताना चाहती है।
हसमुख मेहता
प्रजा ने सोचना है वो कैसा देश चाहती है? मजबूत और स्वावलबी बनाना चाहती है प्रगति के पथ पर चलना चाहती है और सारे विश्व को बताना चाहती है। हसमुख मेहता
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