गुणी मनुष्य
मंगलवार, २७ अक्टूबर २०२०
मैंने ये क्या किया?
खूबसूरत फूल को रोंद दिया
बहुत बड़ा गुनाह कर दिया
मेरे दिल ने मुझे कोस दिया।
उनकी देखो मासुमियत
खिलते है बाग़ में नियमित
कभी नहीं रखते मन में खोट
फिर भी हम पहुंचाते चोट?
मेरे मन में कंपकंपी सी आ गयी
थोड़ी देर तो दिल को हिला गई
क्या खूबसूरत होने का यही अंजाम होगा?
क्या खूश्बु फैलाने वाला यूँही रोता रहेगा।
मेरा दिल कराह उठा
मन ही मन में रो उठा
यदि अच्छे होने का अंजाम यही होना है
तो फिर जीवन में बदलाव जरूर लाना है।
खूबसूरती होती ही है देखने के लिए
मन को दूर से बहलाने के लिए
इसका मंथन होना जरुरी है
क्या ऐसा करना हमारी मज़बूरी है?
खुशबु को महकाना यदि जुर्म है
तो अच्छा कर्म क्या है?
कब तक हम पाप की गठरी बांधे रहेंगे
और अपने आप को गुणी मनुष्य की व्याख्या देंगे।
डॉ जाडीआ हसमुख
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कब तक हम पाप की गठरी बांधे रहेंगे और अपने आप को गुणी मनुष्य की व्याख्या देंगे। डॉ जाडीआ हसमुख