हम दोनों का मिलन ham dono ka
वो समां गयी है मेरे दिल में
दिलो दिमाग और सपनो में
में खोजता रहता हूँ उसे दिन में
ओऱ रात हो जाती है उसे ढूंढ ने में। हम दोनों का मिलन
दिल में उठी है एक तशर
और फिर होने लगता है शोर
में गुमसुम सा बैठ रहता हूँ
उसे याद करके अपने आप को सम्हालता हूँ। हम दोनों का मिलन
वो कुछ कहना चाहती थी
मुझे मिलना भी चाहती थी
में नादान समझ नहीं पाया
उसकी नजरो का ताग नहीं लगा पाया। हम दोनों का मिलन
प्यार के तार ऐसे ही जुड़ते है
वक्त गुजरने के बाद यूँही रुलाते है
एक हसीन सा सपना बार बार सामने आ जाता है
मानो कुछ लब्जो से ही बहुत कुछ समझाता है। हम दोनों का मिलन
प्यार रटन क्यों लगा रहता है?
दिल में चुभन और लगन लगाए रखता है
में खो जाता हूँ उन हसीन सपनों में
ऐसा तो तभी होता है जब लगाव सा होता है अपनों में। हम दोनों का मिलन
उसको भुला ना ही बेहतर होगा
कामकाज भी मन अवश्य लगे गा
उसकी ये अजब दास्तान है
हम दोनों का मिलन बस आदान प्रदान ही है। हम दोनों का मिलन
x aap bheje naa. Unlike · Reply · 1 · 4 hrs 12 minutes ago
xwelcome sarkar hui madhumita Unlike · Reply · 1 · Just now 9 minutes ago
welcoem harish solanki Unlike · Reply · 1 · Just now 11 minutes ago
x welcome saavi shrivaastva Unlike · Reply · 1 · Just now 11 minutes
welcome Rajesh Labana Unlike · Reply · 1 · Just now
x sudhir jain Unlike · Reply · 1 · Just now 7 minutes ag
x gurucharan singh hora Unlike · Reply · 1 · Just now 7 minutes ago
x gurucharan singh hora Unlike · Reply · 1 · Just now today by
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Piyush Joshi कविता का अंतिम बंद इतना अच्छा नही लग रहा। See Translation Unlike · Reply · 1 · 4 hrs 12 minutes ago