हमने ना जाना...Hamne Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

हमने ना जाना...Hamne

हमने ना जाना
मंगलवार, ७ सितम्बर २०२१

ना ही आवारगी है
और नहीं दीवानगी
नाही आप दिखा सकते है मर्दानगी
हम तो सिर्फ ले सकते है ओवारगी।

मुहोब्बत कहो या प्यार
क्या है इसका सार?
मुहोब्बत क्या है तत्व?
इसमें तो समा है सं सत्व!

प्यार को हमने ना जाना
इसकी परिभाषा को हमने ना माना
ना कहा और नाही सूना
बस कर दिया अनसुना।

ना किसीका काबू रहा
नाही किसीका जुल्म सहा
बस अपने दिल को माना
उसे देखता रहा सारा ज़माना।

पता ही नहीं चला
कब हमारा दिल हो गया मनचला!
हम नहीं सोच पाए किसका जादू चला?
बस हमे अपना बना ही डाला

डॉ. हसमुख मेहता
चित्र: -प्रमोद कश्यप

हमने ना जाना...Hamne
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हम नहीं सोच पाए किसका जादू चला? बस हमे अपना बना ही डाला डॉ. हसमुख मेहता चित्र: -प्रमोद कश्यप
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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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