हमे है मुहब्बत.. Hane Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

हमे है मुहब्बत.. Hane

Rating: 5.0

हमे है मुहब्बत
शनिवार, १४ मार्च २०२०

नाम लेते ही बदनाम हो गए
जिंदगी से गुमनाम हो गए
कुछ तो अच्छा नाम होगा उसका
प्यार किया है तो डर काहे का?

दिल यूँ ही नहीं मिलते!
बातें यूँ ही नहीं करते
यदि प्यार उमड़ता ही रहेगा
तो दिल तो अपनी बात करेगा।

किसी को पता नहीं रहता
बस हर दिल अपनी ही बात करता
आँखे चुराता पर कह जरूर देता
जमाने का डर जरूर सताता।

दिल धबककर रखता ख़ामोशी
ना हो जाय मेरी नामोशी!
लोग क्या कहेंगे दिल से?
मन उलझता रहता इन बातों से।

" केह के तो देखो"?
प्यार के मज़े तो चखो!
इतनी हिम्मत तो जुटाओ
मिट तो वैसे ही जाना है परवानो।

दिल का पतावता कोई नही
दिल मानता है वो ही सही
ना दिल देखता है जातपात
ना मिलने पर हो जाता कुठराघात।

ऐसे प्रेम से है हमें भी मुहब्बत
बस थोड़ी सी हो मन की मरम्मत
बस भटकता रहता है गलियारों में
दुश्मनी की लकीर खींचता है यारों में।

हसमुख मेहता

हमे है मुहब्बत.. Hane
Sunday, March 15, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 15 March 2020

ऐसे प्रेम से है हमें भी मुहब्बत बस थोड़ी सी हो मन की मरम्मत बस भटकता रहता है गलियारों में दुश्मनी की लकीर खींचता है यारों में। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal

0 0 Reply
Mehta Hasmukh Amathalal 15 March 2020

ऐसे प्रेम से है हमें भी मुहब्बत बस थोड़ी सी हो मन की मरम्मत बस भटकता रहता है गलियारों में दुश्मनी की लकीर खींचता है यारों में। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal

0 0 Reply
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
Close
Error Success