नाम पार्टी का जब 'इंडिया'पड़ गया।
वक़्त का बादशाह, नाम से डर गया।
काम आएगा उनको न अब मालो ज़र।
मात देगी उन्हें, इंडिया की लहर।
वोट अब इंडिया का बंटेगा नहीं ।
हम लड़ेंगे, वो जब तक हटेगा नहीं।
है अवामी, ये पार्टी अमन के लिए।
साथ हैं सारी पार्टी, वतन के लिए।
देश के नाम पर, सबका सब जुड़ गया।
नाम पार्टी का जब 'इंडिया' पड़ गया।
खलबली ये बताती है हारेंगे वो ।
अपने अब्बा को अबकी पुकारेंगे वो ।
मुल्क का नौजवां कह रहा है सुनो।
इंडिया के ही नेता को मिल कर चुनो ।
है बचाना वतन की अगर आबरु ।
करना होगा वतन के लिए जुस्तजू
होगी पुरी तभी जा के हर आरज़ू।
अपनी ज़िद पे अगर, नौजवां अड़ गया।
वक़्त का बादशाह नाम से डर गया।
भक्त भी भक्त उनके नहीं रह गए।
अच्छे अच्छे भी, झूठा उन्हें कह गए।
बात करते हैं मन की, वो जन की नहीं।
बात करते हैं अब कालेधन की नहीं।
सातवें आसमां पर है महंगाई दर ।
ऐसे महंगाई में कैसे होगा गुज़र ।
है परेशान अंदर से हर एक बशर ।
गांव, टोला, मुहल्ला हो या हो शहर ।
आम इंसान की कोई सुनता नहीं।
एक मुसलमान की कोई सुनता नहीं।
ऐसी सरकार से क्या भला फ़ायदा।
ज़ेहनी बिमार से क्या भला फ़ायदा।
लोग लड़ने लगे और मरने लगें।
अपने ख्वाबों का सोदा भी करने लगें।
इसलिए है ज़रूरत के बदलें उसे ।
है अमीरों से उल्फ़त मुहब्बत जिसे ।
नौजवां हिंद का, ये अहद कर गया
नाम पार्टी का जब इंडिया पड़ गया।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
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