इंकार ना करना
Friday, November 1,2019
7: 23 AM
इंकार ना करना अब
मेरे दिल को छू गए हो
दिल में बस गए हो
रग रग में समा गए हो।
लोगो ने दी खूब नसीहत
सम्हालो अपनी तबियत
रखो साफ़ अपनी नियत
मिलते रहो नियमित।
प्यार तो एक उपहार है
सामने वाला भी होनहार है
मेरा पथदर्शक और अनोखा प्यार है
मुझे मझधार से बचानेवाला माझी है।
बात करे संसार की तो वो असार है
पर उसका स्वभाव मिलनसार है
मिलने को सदैव उत्सुक
और दिलसे भावुक भी है।
में हो गई सवार
अपनी नैया पर
उसके आने की ही देर है
मेरे मन में मनसूबे ढेर सारे है।
में रहु सदा बहावरी
देखती रहु प्यार की मारी
दिल सदा रहता उदास और भारी
नहीं कुछ सुहाता पर लगता प्यार सुनहरी।
हसमुख मेहता
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में रहु सदा बहावरी देखती रहु प्यार की मारी दिल सदा रहता उदास और भारी नहीं कुछ सुहाता पर लगता प्यार सुनहरी। हसमुख मेहता .poemhunter