इंकार ना करना .. Inkaar Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

इंकार ना करना .. Inkaar

Rating: 5.0

इंकार ना करना
Friday, November 1,2019
7: 23 AM

इंकार ना करना अब
मेरे दिल को छू गए हो
दिल में बस गए हो
रग रग में समा गए हो।

लोगो ने दी खूब नसीहत
सम्हालो अपनी तबियत
रखो साफ़ अपनी नियत
मिलते रहो नियमित।

प्यार तो एक उपहार है
सामने वाला भी होनहार है
मेरा पथदर्शक और अनोखा प्यार है
मुझे मझधार से बचानेवाला माझी है।

बात करे संसार की तो वो असार है
पर उसका स्वभाव मिलनसार है
मिलने को सदैव उत्सुक
और दिलसे भावुक भी है।

में हो गई सवार
अपनी नैया पर
उसके आने की ही देर है
मेरे मन में मनसूबे ढेर सारे है।

में रहु सदा बहावरी
देखती रहु प्यार की मारी
दिल सदा रहता उदास और भारी
नहीं कुछ सुहाता पर लगता प्यार सुनहरी।

हसमुख मेहता

इंकार ना करना .. Inkaar
Thursday, October 31, 2019
Topic(s) of this poem: november,poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 31 October 2019

में रहु सदा बहावरी देखती रहु प्यार की मारी दिल सदा रहता उदास और भारी नहीं कुछ सुहाता पर लगता प्यार सुनहरी। हसमुख मेहता .poemhunter

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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