जगहसाई... Jaghasai Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

जगहसाई... Jaghasai

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जगहसाई

शनिवार, ११ अगस्त २०१८

कौन अपना बना सकता है?
क्या यह इतना आसान है?
किसीको कह देना की में अपनाना चाहता हुँ
यह कहकर आप आपको रास्ते से अलग कर रहे हो।

दिल का मिलना आवश्यक है
आप वयस्क तो है
पर जवाबदारी निभाने के लिए पुख्त है की नहीं!
यस साबित कर ने लिए पर्याप्त समय नहीं।

भले ही वो अकड़ू रहती हो
अपने आप को चाँद का टुकड़ा समझती हो
पर उसके लिए भी सब बेकार है
यदि वो अपने गिमान में मस्त रेहती है

संसार का नियम है
लोग भी उसपर कायम है
एक दूसरे के बिना जीवन का वहन नहीं
इसलिए प्यार का आह्वाहन देना बिलकुल है सही।

बात मात्र लेना ही समझदारी है
दिखानावफादारी भी है
नहीं तो वह एक खेल बनकर रह जाएगी
आपकी सब के सामने जगहसाई हो जाएगी।

हसमुख अमथालाल मेहता

जगहसाई... Jaghasai
Friday, August 10, 2018
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 10 August 2018

बात मात्र लेना ही समझदारी है दिखाना वफादारी भी है नहीं तो वह एक खेल बनकर रह जाएगी आपकी सब के सामने जगहसाई हो जाएगी। हसमुख अमथालाल मेहता

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Mehta Hasmukh Amathaal

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Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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