जहाँ रोशन होगा
इश्क़ या महोब्बत
बस आ जाती है उसकी नौबत
लोग कहे है "असर है सोबत का"
हम कहे है 'बस प्यार है असर रंगत का'.
कहो ना बहारों से ना खिले
फूलों में अपना डेरा ना डाले
बस खली महक महक किया ना करे
साथ में प्यार का इजहार भी करें।
हम क्या समझे प्यार के इशारे?
बस मौसम तो है पुकारे?
हम है अल्हड, प्यार के पुजारी
बन गयी है धीरे से यारी।
'हमें नसीब नहीं तो किसी को नसीब नहीं'
ये अंदाज़ छोड़ ना होगा यहीं का यहीं
हम सब प्यार के लिए वास्तवमे भूखे है
बस बिखरने की शायरी में सूखे है।
बह जायेंगे कभी नदी के बहाव में
या तो मर जायेंगे लोगों के बदलाव में
प्यार के लिए खून बहेगा और आँचल भी मैला होगा
हम सब को अब तो मिलकर रहना होगा।
यादें पुरानी होती जाएगी
हम पर भी थोड़ा अपनापन दिखा जाएगी
क्या कर सकते है हवा के रुख के आगे?
झुकना होगा बस भले ही सब अपना raag आलापे!
यह नहीं है हमारे संस्कार
हमपर है उनके बहुत भारी उपकार
हम कब के लुप्त हो चले होते
इश्क़ के परवाने कब मरने से डरते।
कुदरत का करिश्मा हमें समजना होगा
हर कदम में कदम मिलाना होगा
सारथि कोई मिल जाएगा तो जहाँ हमारा होगा
पल में ही शिकस्त होगी और पल में ही जहाँ रोशन होगा।
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