जल्दी उठ जाना.. Jaldi Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

जल्दी उठ जाना.. Jaldi

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जल्दी उठ जाना
मंगलवार, २२ अक्टूबर २०१९

सुबह जल्दी उठा जाना
उसी के गुण गाना
सब रहे सलामत
कुदरत की है ये करामत

हवा का है यही कमाल
कर देती है मालामाल
सेहत हो जाती सुर्ख लाल
कदम भी मिलाते उसी के साथ ताल।

जब हो मन में शांति
नहीं आती कभी अशांति
सुखचैन रहता कायम
राखी यही अपना नियम।

देर से उठना
आलस को दावत देना
जिंदगी भरी रहे उदासी
तुम सदा रहते दास ओर दासी।

जीवन में नहीं होती कोई प्रगति
फिर हो जाती तुम्हारी दुर्गति
नहीं होती किसी से प्रीति
मरी जाती अपनी ही मति।

दूर कर दो अपने से आलस
रखो स्वभाव अपना सालस
लेते रहो भाग सभी मजलस
आगे बढ़ी तुम कर के संतलस।

मिला है तुम्हे सुनहरा अवसर
मानवजीवन में ना छोडो कोई कसर
गुजर जाए एकबार तो रोना ही पडेगा
बाद में अक्सर पछताना रहेगा।

हसमुख अमथालाल मेहता

जल्दी उठ जाना.. Jaldi
Tuesday, October 22, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Abhishek Singh 22 October 2019

बहुत सुन्दर बातें. सभी को अपने जीवन में व्ययहार में लाना चाहिए.

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Mehta Hasmukh Amathalal 22 October 2019

मिला है तुम्हे सुनहरा अवसर मानवजीवन में ना छोडो कोई कसर गुजर जाए एकबार तो रोना ही पडेगा बाद में अक्सर पछताना रहेगा। हसमुख अमथालाल मेहता Hasmukh Amathalal

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Mehta Hasmukh Amathaal

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Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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