जवाब देना है... Jawab Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

जवाब देना है... Jawab

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जवाब देना है
गुरूवार, १४फरवरी २०१९

आँखों से अश्रु गिर पड़े
जब हमारे कान में ऐसे समाचार सुन ने पड़े
आतंकवादीओ ने फिदायीन हमला किया
हमारे झझबात को झंझोड़ दिया।

फौजी दस्ते को निशाना बनाया गया
आत्मघाती हमले को इंजाम दिया गया
पूरी विस्फोट से लदी हुई कार को बस से भिड़ा दी
पुरे ४२ जवानो को जान से कुर्बानी देनी पड़ी।

पडौसी हमारे मसले में दखल दे रहा है
फिर भी हम उसके साथ अच्छा सलूक कर रहे है
पत्थरबाज आतंकियों का साथ दे रहे है
और जवानों को अपना शिकार बना रहे है।

आज तो हद ही हो गई
अब हमें आरपार की लड़ाई करनी है
आतंकवादियों का सफाया करना है
और अमनचैन कायम करना है।

जब वो लोग अपने वजूद को मिटाना चाहते है
और सामने आकर हमें ललकार रहे है
तो हमें उनका प्रतिकार करना है
और पाक धरती से सफाया करना है।

आज हम नतमस्तक है
मन से बहुत दुखी है
जवानों ने अपनेको कुर्बान कर दिया है
अब हमें उसका जवाब देना है।

हसमुख मेहता

जवाब देना है... Jawab
Thursday, February 14, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 14 February 2019

S.r. Chandrslekha Very sad. RIP. 1 Delete or hide this Like · Reply · 13m

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Mehta Hasmukh Amathalal 14 February 2019

Marjorie Hansen 9 mutual friends 1 Edit or delete this Like · Reply ·

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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