जी जान से
बुधवार, २० मई २०२०
तू थी, रात थी और चाँदनी भी
सितारे भी छीप गए शांत हो गई रात भी
मिलन होने दिया,रात कटती गई
बेजुबा दो आत्माए एक दूजे में समा गई।
भोर भई और में चल पडा
मन में थोड़ा सा बल पड़ा
क्या होगा जीवन मे इसके बाद?
होने लगा मन में संवाद।
नहीं दूर जाना अब जिंदगी से
बस गुजारना समय उसकी बंदगी से
मकसद हमारा पूरा हो गया
मुराद को भी जवाब मिल गया।
क्यायही है जीवन की सौगाद?
या बन के रह जाएगी एक याद!
करना है हमें कुछ इलायदा
जीसे होता रहे कुछ फायदा।
ना हमने जान ना चाहा ना पूछा
पर मनमें रही एक मनसा
क्या होगा इस जीवन में हमारा फलसफा!
क्या सिर्फ खाएंगे, पिएंगे और हो जाएंगे दफा?
जीवन हमारा, ध्येय भी हमारा
रखना है हमें सदा भाईचारा
रहना है हमें सद्दा इस वतन
करते रहेंगे जी जान से जतन।
हसमुख मेहता
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जीवन हमारा, ध्येय भी हमारा रखना है हमें सदा भाईचारा रहना है हमें सद्दा इस वतन करते रहेंगे जी जान से जतन। हसमुख मेहता