कहाँ लगती है देर.. kahan lagti hai Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

कहाँ लगती है देर.. kahan lagti hai

कहाँ लगती है देर

ये तेरी कहानी
नहीं है पुरानी
हर युग में तू है सतानी
फिर क्यों लगे तुझको इसकी परेशानी?

हर युग में, तेरा ही गुनाह पाया
यह मेरी समाज में ना आया
जिसकी कोख से तुम पैदा हुए
उसी कोख को तुम सदा दुःख दिए।

में कहता फिरू सुनो, ओ जगवालों
देखता रहता है दुखी उपरवालो
कभी कहर बनकर टूट पडेगा
सितमगर और जालिम, तुम्हे सब महंगा पडेगा

ना रहेगा नामोनिशान
न मिलेगी कोई पहचान
न रहेगी शौकत ओर शानबान
अगर उपरवाला रहेगा ना महेरबान।

उसकी आंखोके आसु बर्बाद कर देंगे
कभी सुख चेन से जीने नहीं देंगे
हमारी अगली पीढ़ी पता नहीं कैसे देखेगी?
पर एक बात सच है, वो मुंह की जरूर खायेगी।

इतनी अधोगति और इतना पतन
वो भी धर्म की धरती ओर हमारे वतन
कोई नहीं सोच सकता इतनी जंगालियत
क्या यही हमारी पहचान है ओर असलियत

कहो उनको भी वो कायदे से रहे
अपने हुस्न की सरेआम नीलामी ना करे
सब जानते है फूलों का काल कितना होता है
समय बीत जानेपर क्या हाल होता है?

कहना मुझे आज भी नहीं चाहिए
आम स्वतंत्रता पे कोई परहेज नहीं करना चाहिए
पर सही बात को समझने में गलत वकालत भी नहीं चाहिए
जो बात अपने स्वमान से जुडी हो उससे कतराना भी नहीं चाहिए।

आग को हवा के रुख से दूर रखना चाहिए
संमोहजनक चेस्टाओं से अपने आपको बचाना चाहिए
देर नहीं लगती अपनों जान और स्वमान गंवाने में
कहाँ लगती है देर परवाने को आग से जल जाने में

Friday, July 18, 2014
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM

Keshav Kumar Wah lajawab sir Just now · Unlike · 1

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welcome chandran kiran Just now · Unlike · 1

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Santoshkumar Rout likes this. Hasmukh Mehta welcome Just now · Unlike · 1

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welcom sanjay kurmi Just now · Unlike · 1

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welcome archna patel Just now · Unlike · 1

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Manish Kumar UNIQUE..SIR July 19 at 12: 31pm · Unlike · 1

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Kumarendra Mallick Her smile can buy off seven heavens, , , July 19 at 10: 42pm · Unlike · 1

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Hasmukh Mehta welcome Lhen Esposo, Maria Jaqueline Singlan Sosa, Priy Aashish a 1 min · Unlike · 1

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Hasmukh Mehta welccome chander kiran, sajan ahir, jairam tiwari, and moh nish Just now · Unlike · 1

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welcome rajneesh Just now · Unlike · 1

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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