कल्पना नहीं.. Kalpana Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

कल्पना नहीं.. Kalpana

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कल्पना नहीं
शनिवार, २१ मार्च २०२०

वो ही जीवन में मायना रखते है
जो हरदम आइना दिखाते है
जीने की राह को आसान कर देते है
समय आनेपर अपने को कुबान कर देते है।

नाही यह कोरी कल्पना नहीं है
और संजोया सपना है
यह तो बड़ी समस्या है
फिर भी जीवन में अमावस्या नहीं है।

हम अपने आप को ढाल देते है
समय को पूरा मान देते है
किसी को याद करके अपने को मना लेते है
इस बात का ढिंढोरा नहीं पीटते है।

याद भी उन्ही को करते है
जो दिल में बसे होते है
याद बार-बार आती है
और मिलने को तरसाती है।

इसका जीवन पर प्रभाव ज्यादा है
हर आदमी इसपर आमादा है
क्योंकि यही उसकी सम्पदा है
यही उसकी प्रभुता है।

कुदरत का ये अप्रितम तोहफा है
अपने आप में अनूठा और अनुपम है
जीवन में ख़ुशी लानेवाला उदगम स्थान है
यह नहीं मानो तो, जीवन से ख़ुशी का प्रस्थान है।

हसमुख मेहता
आभार. नविन चंद्र भौमिक

कल्पना नहीं.. Kalpana
Saturday, March 21, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 21 March 2020

कुदरत का ये अप्रितम तोहफा है अपने आप में अनूठा और अनुपम है जीवन में ख़ुशी लानेवाला उदगम स्थान है यह नहीं मानो तो, जीवन से ख़ुशी का प्रस्थान है। हसमुख मेहता आभार. नविन चंद्र भौमिक

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Mehta Hasmukh Amathaal

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Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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