करे अनुकरण..Kare Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

करे अनुकरण..Kare

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करे अनुकरण..kare
रविवार, १५ मार्च २०२०

यथा राजा तथा प्रजा
इसी में है सुख और मजा
दोनों यदि सुख चेन से रहे
तो फिर चिंता काहे?

क्यों हम सहे?
इसे लाचारी कहे
क्या ये हमारी समज से है परे?
और हम है बेचारे?

यदि थोड़ी सी चूक हो जाए
तो जीवन बर्बाद हो जाए
सूरज अपनी आदत छोड़ दे तो?
चन्द्रमा अपनी शीतलता छोड़ दे तो?

मुश्किल है समजना
ओर समजाना
कोई नहीं है यहाँ पर अनजाना
सब ने यही समजा और जाना।

चाहो तो कर लो विश्लेषण
समजो तो ये है आभूषण
पर समय बदले हो जाते
अपने ही अपनों को सताते।

पतन का मूल कारण
हमेशा लगता अकारण
बंध हो जाना चाहिए ये प्रकरण
सब अपनी मर्यादा मे रहे और करे अनुकरण।

हसमुख मेहता
Courtesy: S R Chandrslekha

करे अनुकरण..Kare
Sunday, March 15, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 15 March 2020

पतन का मूल कारण हमेशा लगता अकारण बंध हो जाना चाहिए ये प्रकरण सब अपनी मर्यादा मे रहे और करे अनुकरण।

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Mehta Hasmukh Amathaal

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Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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