कर लो बंदगी.. Karlo Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

कर लो बंदगी.. Karlo

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कर लो बंदगी
शुक्रवार, ३१ जुलाई २०२०

कर लो जी भरकर बंदगी
संवार लो अपनी जिंदगी
ना रह जाए कोई कमी
आँखों में रहे सदा अमी।

जिंदगी जैसे-तैसे बसर नहीं करनी है
बस उसको आबाद करनी है
अपने उसूलो पे कायम रहना है
सब की बातो को सुनना भी है।

जिंदगी पता नहीं कैसे करवट बदले
हम से उसकी कीमत वसूल कर ले
बहुत ही मुसीबते खड़ी कर दे
अपने नजरों से कब गिरा दे?

हम ने भी ठान ली है
डटकर मुकाबला करना है
छोटी - मोटी ती चीजों को मनपर नहीं लाना है
मन को सदा प्रफुल्लित रखना है।

जिंदगी को सुख से भर देना है
ना किसी से वेर और ना किसी से उलझना है
सब से मिलकर जीवन में अमृत का अनुभव करना है
अपने आप को अदना इंसान और प्रभु का अंश मानना है।

डॉक्टर हसमुख मेहता

कर लो बंदगी.. Karlo
Friday, July 31, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 01 August 2020

कर लो बंदगी और एक सूत्र, दोनों कविता बहुत ही सुंदर है। मुझे बहुत ही अच्छा लगा।.. s r chandraslekha

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Mehta Hasmukh Amathalal 01 August 2020

S. R Chandralekha Delete or hide this 1 Like · Reply · 1d

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welcome s r chandrslekha

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Hello dear How are you. Today's Hindi poem is as beautiful as blooming flowers in Winter morning... s r chandrslekha

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सब से मिलकर जीवन में अमृत का अनुभव करना है अपने आप को अदना इंसान और प्रभु का अंश मानना है। डॉक्टर हसमुख मेहता

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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