कर्मफल.. Karm Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

कर्मफल.. Karm

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कर्मफल
शनिवार, १५ फरवरी २०२०

बुरे कर्मो का बुरा फल
हमेशा कहते है लोग आजकल
पर करते रहते है बुरे काम
निष्फल रहते है उनके काम तमाम।

कुदरत का नियम है
उसपर दुनिया कायम है
जैसा बोओ वैसा ही पाओ
अच्छे काम से स्वर्ग को पाओ।

किसी ने नहीं देखा ऊपर की दुनिया
पर माना है सब का कहा
सच के पथ पर कठिनाई जरूर है
पर उसका परिणाम अक्सीर है।

हमें देखा है लोगों को सहन करते हुए
बाद में पछतावा करतेअपने आपको कोसते
अब पछताए हॉत क्या? जब चिड़िया चुग गई खेत
आदमी सोचता है यही है शुरुआत के संकेत।

एक बात तो पक्की है
गुनहगारों को पीसनी चक्की है
इधर से छूट जाओ तो वहां का नियम कड़क है
सभी को इस बात की फड़क है।

केहते है "नेकी कर और कुंए में डाल"
अपना हिसाब यहींपर सम्हाल
ना आएगी तेरे लिए सुनहरी कल
बस भोग तू अपने कर्मो का फल।

जो किया है उसका कर्ज चुकाना है
अपने संसार का फर्ज भी निभाना है
आटे मे नमक तो चल जाएगा
ज्यादा की लालच मुसीबत ले आएगा।

हसमुख मेहता

कर्मफल.. Karm
Sunday, February 16, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 16 February 2020

जो किया है उसका कर्ज चुकाना है अपने संसार का फर्ज भी निभाना है आटे मे नमक तो चल जाएगा ज्यादा की लालच मुसीबत ले आएगा। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal

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Mehta Hasmukh Amathaal

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