कसूर किया है
शनिवार, ३ अक्टुम्बर २०२०
मुज से मिलो प्रभु श्याम
जीवन की हो गई है शाम
मेरा सहारा हो घनश्याम
अब नहीं रही इतनी हाम।
कुछ नहीं किया सारे साल
अबतो हो गया बेहाल
सूझ नही आती "में अब क्या करू "
चरण पडु की ध्यानधरु।
अब तो हो तुम ही सहारा
मेरी किश्ती को पार उतारा
नहीं दिखता मुझे कोई किनारा
हो गया जैसे बेसहारा।
सूना है आप हो "पालनहारा"
जगत को तारनारा और जीवनदाता
आप सुनते सब की विनती
सब के मुखपर आपकी गीनति।
सोच लिया है मैंने दिल से
निकाल दिया है मैला मन से
अब जो कुछ करुँगा आपके सहारे
जीवन से अब कोई नहीं हारे।
अब सुन लेना विनती हमारी
माफ़ी मांगे हम तुम्हारी
कसूर किया है. मान लेते है
दोल से दे दो चरण छुए है।
डॉ जाड़िआ हसमुख
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कसूर किया है. मान लेते है दोल से दे दो चरण छुए है। डॉ जाड़िआ हसमुख