खुश्बू देता.. Khushbu Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

खुश्बू देता.. Khushbu

Rating: 5.0

खुश्बू देता
शुक्रवार, २३ अगस्त २०१९

खुशनुमा मौसम का एक झोका हो तुम,
खश्बु देता गुलाब हो तुम
महके महके सदा रेहतो हो तुम
मेरे दिलको सुकून देते हो तुम।

कभी गुजरो हमारी राहपर
थोड़ा सा झांक लेना दिलबर
हम तो खोये खोये से रहते है
बस एक झलक पाने के इंतजार में।

ना करवाना ज्यादा इंतजार
तुम तो हो बडी मिलनसार
थोड़ा सा दे देना आसार
हो जाएगा सफर थोड़ा सा आसान।

मिलना एक संजोग होता है
उसे यादगार बना एक योग(समय)होता है
हम चल पड़े है एक सफर की और
ना हो जाए बाद में कोई शोर।

इरादा हो मन में मक्कम
तो नहीं चलती किसीकी तिकड़म
हमें तो बनेंगे ही हमदम
बाद उसके पहले ना निकल जाए दम।

मिसाल बन जाए हमारी सख्सियत
यही तो है इसमें खासियत
नहीं बनानी पड़ती कोई वसीयत
बस रखनी पडती है अच्छी और नेक नियत।

हसमुख मेहता

Thursday, August 22, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 23 August 2019

Sheetal Mehta 14 mutual friends Message

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Mehta Hasmukh Amathalal 23 August 2019

Rose Nicol Marquez 1 mutual friend 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m

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Mehta Hasmukh Amathaal

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