कुछ ना कहे
रविवार, ५ जुलाई २०२०
कुछ ना कहे हमारी आँखों के बारे में
हम कुछ ढूंढ रहे है प्रकृति के नजारो में
कहीं नहीं मिलती हमें हमारी मंझिल
थोड़ी सी आशा की किरण जगती और फिर हो जाती ओझिल।
"तुम्हारी आँखों में समंदर की लहरे है "
उसमे हमें डूबा देने की शक्ति है
में नहीं देती कोई जवाब
ओर नाही जाहिर करती कोई रुआब।
मेरी आँखे वो ही दिखती है
जिसकी मुझे जरुरत है
मुझे जीवन-साथी चाहिए
अपने पथ पर चलने के लिए।
मेरा अभिगम निष्पाप और पवित्र है
कुछ अप्रिय चीजे सर्वत्र है
पर में नहीं मानती किसी का दबाव मुझपर चल जाय
मेरे विचारो के विपरीत कुछ असर दिखा जाय।
मेरे आँखे मेरा दर्पण है
उसमे जीवन का समर्पण है
मेरी आत्मा उसमे अर्पण है
और जीवन में लिया हुआ एक प्रण भी है।
हसमुख मेहता
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मेरे आँखे मेरा दर्पण है उसमे जीवन का समर्पण है मेरी आत्मा उसमे अर्पण है और जीवन में लिया हुआ एक प्रण भी है। हसमुख मेहता