क्या नाम दें
है ये जिंदगी का बंधन बेजोड़, इसे क्या नाम दें?
ले जाती रही खींच प्यार की डोर, इसे क्या नाम दें?
साथ साथ चलते रहे हम, धूप, छाँव भी सहते रहे,
लेकर आया जिंदगी को इस छोर, इसे क्या नाम दें?
तूफां की परवाह किये, ना सैलाबों की थाह लिए,
पाया नहीं रोक, आँधियों का जोर, इसे क्या नाम दें?
फूलों का मुख चूमा हमने, काँटों को रौंदा हमने,
पार किये गहन अंधियारों का दौर, इसे क्या नाम दें?
दुखाया होगा एक दूसरे के, दिल को जरूर कभी,
दर्द ना सका मगर हमको झकझोर, इसे क्या नाम दें?
बने हमराही दूर के सफर के, ज्यूँ कल की बात हो,
लम्बी हम ये राह काटे जिस तौर! इसे क्या नाम दें?
परस्पर प्यार कि समर्पण है, या आपसी विस्वास है!
समझ सके ना, करके भी बहुत गौर, इसे क्या नाम दें?
एस० डी० तिवारी
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साथ साथ चलते रहे हम, धूप, छाँव भी सहते रहे, ...Life is like this and we feel this with softness of flowers and hotness of summer. We never lose patience and walk ever with courage and tolerance. We have dedication, love and cooperation among each other and we live in this world family happily. An excellent and sweet poem is beautifully penned...10